Friday, September 19, 2014

Suna ye saaj hai

Raat bhar nayno mey ek sapna rota hai
Raat bhar tanhai mey Aakhen khood se ladti hai,

Ab na Koi Lori gaane wala hai.
Na Koi Tere sapno ko sajone wala.hai

Tanhaa yun hi tamaam Umar gujarna hai
Na chaahte hue bhi waqt tak chalna hai

Mey so jaau agar gahri neend mey kabhi
To tum aakar utha na jana

Ab hos m Aane ka koi iradaa nahi
Koi pooche to mahkhaane ka raasta bata dena

Ek Gaana

Main koi nagmaa sunata hun...
Tum so jao main koi aesa geet gaata hun
Main koi nagmaa sunata hun
Aaye na tere aakhon mey aashu
Aesa kuch main sunata hun...
Palko pe rahe Tere sapne
Mil jaayenge tujhko apne.
Main gaa kar tujhko sulata hun
Apni aakhon ki nindyaa tujhko de jaata hun
So jao tum meri pari
Yun na,tum Jidd pe ado
Kho gye hai Tere apne
Sitaro mey hai kahi chppi
Awaaz do aa jaayegi;
Tujhko gaa key Lori suna jaayegi....
So jao meri pari
So jao meri pari

Tuesday, February 4, 2014

चल सखी अब चलते ....

चल  सखी  अब  चलते  है ;

देर   हुई  अब  फिर  कभी  मिलते  है .

महफ़िल  मे  अब  न  बेठा  जाएगा  सखी ;

आँशु  पैमाने  मे  छलकने  लगेंगे .

चल  सखी  अब  चलते  है …..

फिर  क्या  पता  कभी  मिलना  हो  न  हो ;

इन  सपनो  को  अब  इसी  महफ़िल  मे  दफनाते  है .

अब  न  कोई  अपना  सखी ,न  अब  कोई  सपना ;

दुनिया  कि  भीड़  मे  अब  खोते  है .

चल  सखी  अब  हम  चलते  है ….

Monday, February 3, 2014

तुम, मैं और यादें....

कहाँ ढूंढ़ती हो मुझे अब तुम
उन किताबो के पन्नो मे, जो पीले पड़ गये है
या उन फूलो के पँखुड़ियों मे, जो अब सूख चुके है 
या उन यादों मे जो अब तुम्हारे  होकर भी तुम्हारे नहीं है।  

मैं तो तुम्हारे संग हूँ। …
ढूंढो तो सही....

जब तुम नहा के आती हो उन गीले बालो के खूसबू मे....
जब तुम मुस्कुराती हो तो उस मुस्कान मे...
या फिर तुम्हारे निम्बू के चटकारों मे....
जब तुम थक कर सोती हो तो उस नींद मे "मैं"हूँ। 

कहाँ से निकलोगी तुम मुझे 
मैं तो एक गंदा रूह हूँ , जो तेरे जिस्म मे हूँ।  
जेसे देश कि नेता खा रहे है देश को 
वेसे मैं तेरे जिस्म को चबाए जा  रहा हूँ।  

न मैं मर सकता हूँ
न तुम मार सकती हो 
मैं अब यमुना नदी कि पानी कि तरह हूँ  
जिस पानी को सरकार सदियो से साफ़ कर रहे है 
मैं वही गंदा रूह हूँ , जिसे तुम नोच कर फेकना चाहती हो।  

मैं जानता हूँ , मैं तुम मे हूँ। …
तेरे जज्बातो से खेलता हूँ हर रोज़ 
जेसे देश कि नेता जनता से खेलते है 
न तुम मुझे निकाल सकती हो 
न देश नेता को बदल सकते है। 

Thursday, January 23, 2014

बाज़ार मे कोई नया नेता आया है .......

सुना है
बाज़ार  मे कोई नया नेता आया है
अपनी बात मनवाने क लिए
रूठ कर खाना छोड़ देता है

अजीब विडंबना है देश का
सोचता हूँ अगर यूँ ही खाने छोड़ देने से देश कि प्रगति हो
तो क्यूँ न देश कि जनता को उपवास कराया जाए

अगर अनसन से लूटी इज्जत वापिस आ जाए
या देश का कला धन आ जाए
या फिर जमाखोर ईमानदार बन जाए
या  घोटाले के लोग ईमानदार बन जाए

कौन समझाए इसे देश कि बच्चे को
क्यूँ सुनायी नहीं देता देश के लोगो कि शिश्किया

हाँ, अनसन से आप नेता बन सकते है
मगर आप इंसान है ये खुद से पूछ लीजिये?
"यहाँ अब अनसन कि नहीं , परिवर्तन कि जरुरत है"
ये "आप" और "मैं" या "सारा समाज" मिलकर ला आ सकता है

देश को आज लूट रहा नक्सल है
कर रहा बलात्कार पडोसी मुल्क है
और हम लड़ रहे है सता क लिए
किसी भी मुल्क़ कि प्रगति अनसन से नहीं होता है
कोई समझाए इसे बाज़ार क नेता को 

Wednesday, January 8, 2014

मेरे अल्फ़ाज़ की आवाज़

कुछ अनकही बातें,
कुछ अनसुनी बातें,
जो मैं कह न सका जो तुम सुन न सकी ,
जाने क्यूँ अब ये अल्फाज़ो  को ढूंढ़ते है!!!

कभी आकर मेरे कविता से तो, कभी आकर मेरे शब्दो से लड़ पड़ते है ,
कभी मेरे सिरहाने आकर सो जाते, तो कभी आशु बनकर निकल पड़ते है।

कभी लगता है इन अल्फाज़ो को कब्र मे दफ़नाउ,
मगर यहाँ इनके दम घुटने लगते है।

क्या करू इन अल्फ़ाज़ों का अब ?
"ये भी तो मेरे सपनो का ही हिस्सा है"
एक असे सपने जो अंत तक है , मेरे आखरी सास तक है
वो बात अलग है कि ये अलफ़ाज़ आज तन्हा है
बिलकुल मेरी तरह। ..........
न ख़तम होने वाली यादों कि तरह। .....

Wednesday, July 10, 2013

Me And You....

खूब मिल बैठेंगे दो कवी
किसी गरीब खाने मे

पी रहे होंगे आधी आधी चाय 
किसी टूटी आशियाने मे 

गुजरते लोग सोचेंगे कितना है हम आवारा 
मगर वो क्या जाने दर्द ए दिल इसे ज़माने मे ,

रात होगी कब्र बन जायेंगे ये शहर वीराने मे
हम लिख रहे होंगे कोई कविता अपने महखाने मे ,

उम्र गुजर जायेंगे जब ,हो जायेंगे जुदा जब
जाने ये दीमक केसे पहुच जायेंगे उन पन्नो मे,

फटी पन्नो को देखकर समझेंगे लोग
कोई कवी भी था इसे ज़माने मैं